Tapo Bhumi Karanwas

सिद्धसंत परम्परा :-
सिद्ध स्थान होने के कारण अति प्राचीन काल से करनवास संत महात्माओ सन्यासियों की तापोस्थली रहा है | इस सिद्ध क्षेत्रान्त्ग्रत निवास करने वाले सभी प्राणी रहस्य मय है | चिरंजीवी एवं योगीजन यहाँ शारीर परिवर्तन करके आज भी निवास करते है | उनेह जो जनता है| वही पहचानता है सिद्ध संत महात्माओ की यहाँ सुदिर्ग परम्परा रही है| अनेक सिद्ध संतो के नाम काल के गर्त मैं विलीन हो गए है | किन्तु श्रुति प्रमाण परम्परा से प्राप्त अनेक महात्माओ के नाम है | जो की निकट अतीत और वर्तमान के जाज्जवल्य्मान संत रहे है | ऐसे संतो मैं कुछ नाम इस प्रकार है |

महात्मा गौतमबुद्ध :-
 भव्य राजमहल,  सुन्दर रानी, कुलदीप पुत्र और विरक्त हो कर ज्ञान प्राप्ति के लिए भ्रमण करते हुए महात्मा गौतम बुद्ध इस क्षेत्र मैं भी आये थे | यही बुधू नाम से प्रसिद्ध स्थान पर प्राचीन स्थान मैं माता का मंदिर था जो आज भी है |यही रहकर उनोहने काफी समय तक तप किया था| लोगो का मनना है की आज भी तमाल का वह सघन का वृक्ष उसी स्थति मैं आज भी है जहाँ पर महात्मा बैठ कर तपस्या किया करते थे |महात्मा बुद्ध के नाम वर्तमान स्थित बुधू माता का मंदिर आज भी प्रसिद्ध है |
सिद्ध बाबा :-
करणवश के प्राचीन संतो मैं सिद्ध बाबा थे |इसी नाम से विख्यात इन संतो को करणवश की झाड़ियो मैं तपस्या करके ही सीधी प्राप्त हुई थी |कहा जाता है कि मुगाल्शासन काल मैं जब संत महात्माओ को उत्पीडन देने के लिए कारगर मैं बंद किया गया तो सिद्ध बाबा को भी जाना पड़ा कारगर मैं संतो को चक्की चलने का आदेश दिया गया | सभी महात्माओ के सामने अत पीसनी चक्की रखदी गयी और उनसे कहा चक्की चलाओ नहीं तो कोड़े पड़ेंगे | सिद्ध बाबा ने चक्की के तरफ ऊँगली से इशारा करते हुए कहा चक्की चल बाबा के कहते ही चक्की अपने आप चल पड़ी और फिर सभी महात्माओ के सामने की साडी चक्की क्रमशः अपने आप तेजी से घुमने लगी | प्रत्येक महात्मा को जो अन्न दिया था वो सारा पिस गया किन्तु चक्की चलना बंद नहीं हुई |चक्की घुमती रही |इस चमत्कार से काराग्रह के सभी कर्मचारी हैरान थे उन्होंने जेक मुग़ल सम्राट को बताया |सुनकर मुग़ल बादशाह वहा आया और उसने बाबा से छमा मागते हुए चक्की बंद करने की प्रार्थना की | तब बाबा ने चक्की बंद की और कहाँ की मेरी तरह ही ये सारे महात्मा शक्तिमान है किन्तु यह अपनी ताप शक्ति छीड नहीं करना चाहते |मेरे साथ इन सभी महात्माओ को भी रिहा करो |बाद मैं गंगा तट पर विचरण करते हुए उन्होंने अनूपशहर से छ कोस उपर अपना शारीर त्याग दिया |आज भी वह सिद्ध बाबा की समाधी है |और यहाँ पर लोग जाकर सिद्ध बाबा की समाधी के दर्शन करते है|

Comments

Amit Pandit said…
nice information.........keep it up
Amit Pandit said…
excellent information.....keep it up
Vipin Kumar said…
I love my janambhumi
Unknown said…
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